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हाइब्रिड मोड में स्कूल, कंस्ट्रक्शन बंद…दिल्ली का AQI 440 पार; लागू हुआ GRAP-4; इन गतिविधियों पर लगी रोक

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GRAP-4 Implemented in Delhi: दिल्ली-NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण की एक बार फिर वापसी हो चुकी है। बीते कुछ दिनों में राजधानी में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 441के स्तर तक पहुंच गया, जिसके चलते कल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-3को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया। लेकिन समस्या में कोई सुधार नहीं दिखने पर GRAP-4लागू कर दिया गया है। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा लिया गया, जो क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। इस स्तर पर प्रदूषण ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए।


GRAP-4क्या है और क्यों लागू हुआ?


बता दें, GRAP एक ऐसा सिस्टम है जो दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करता है। तो वहीं, चरण-4सबसे सख्त स्तर है, जो तब सक्रिय होता है जब AQI 450से ऊपर चला जाता है। इस बार AQI दोपहर 4बजे 431था, जो शाम 6बजे तक 441हो गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह 457तक पहुंचने की बात भी कही गई है।  प्रदूषण के मुख्य कारणों में सर्दियों की ठंडी हवाएं, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन शामिल हैं। इस स्थिति ने अधिकारियों को आपातकालीन उपाय अपनाने पर मजबूर कर दिया। 


GRAP-4में लगे प्रतिबंध


GRAP-4के तहत कई सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनका उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों को सीधे नियंत्रित करना है।


  1. निर्माण और विध्वंस गतिविधियां:इस तरह के सभी कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। जिससे धूल प्रदूषण में कमी आएगी।

  2. ट्रक और वाहन प्रतिबंध:गैर-जरूरी ट्रकों की एंट्री पर रोक। केवल आवश्यक वस्तुओं वाले ट्रक ही प्रवेश कर सकेंगे। साथ ही, नॉन-इलेक्ट्रिक और नॉन-CNG वाहनों पर भी सीमाएं लगाई गई हैं।

  3. शिक्षा और कार्यालय:सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 11तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई होगी। तो वहीं, कार्यालयों में 50%कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की अनुमति दी गई है।


इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों पर अतिरिक्त नियंत्रण, कोयला और लकड़ी जलाने पर रोक और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा। ये कदम प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगे, लेकिन दैनिक जीवन पर असर डालेंगे, जैसे यातायात में देरी और निर्माण से जुड़े रोजगार में कमी।

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