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“यह इंतजार करने का नहीं…”, हिमाचल में तबाही पर कंगना रणौत की चुप्पी ने लोगों को किया नाराज

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Kangana Ranaut on Himachal Cloud Burst:  कहीं मकान ढह गए, तो कहीं किसी के घर का चिराग बुझ गया। लेकिन सांसद जी को के कान में जूं तक न रेंगी। दरअसल, बीते दिनों हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के विभिन्न हिस्सों में देर रात बादल फटने जैसी कई घटनाएं सामने आई हैं। इनके कारण आई तेज बाढ़ और भूस्खलन की वजह से कई लोगों की जान चली गई, और लाखों लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। लेकिन मंडी से सांसद कंगना रणौत ने इस पर चुप्पी साधना बेहतर समझा। लेकिन उनकी यह चुप्पी लोगों को रास नहीं आई, जिसके बाद वे सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुईं। लोगों की नाराजगी को देखते हुए अब कंगना ने अपना स्पष्टीकरण दिया है।


अपनी चुप्पी पर कंगना का स्पष्टीकरण


अपने फेसबुक अकाउंट पर एक ताजा पोस्ट में, मंडी की सांसद कंगना रणौत ने हिमाचल प्रदेश में बार-बार आने वाली बाढ़ की तबाही पर दुख जताया। उन्होंने  लिखा कि ‘हिमाचल में लगभग हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को देखना दिल दहलाने वाला है। मैंने मंडी के सराज और अन्य इलाकों में बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर जी ने सलाह दी कि जब तक संपर्क और प्रभावित इलाकों तक पहुंच बहाल नहीं हो जाती, तब तक इंतजार करें।’


कंगना का बयान और लोगों के रिएक्शन


मंडी की सांसद कंगना रणौत ने अपनी हालिया फेसबुक पोस्ट में बताया कि मंडी जिला प्रशासन ने रेड अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों से अनुमति मिलने का इंतजार कर रही हैं और जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश करेंगी। हालांकि, उनकी इस पोस्ट पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि यह इंतजार करने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने और संकटग्रस्त लोगों के साथ खड़े होने का समय है। यूजर ने निराशा जताते हुए कहा कि ऐसी देरी से उनकी उम्मीदें टूटी हैं, क्योंकि लोगों को अपनी सांसद की मौके पर मौजूदगी चाहिए, न कि सिर्फ अनुमति का इंतजार। उन्होंने कंगना से पुनर्विचार करने और जल्द से जल्द प्रभावित इलाकों में पहुंचने की अपील की, यह कहते हुए कि उनकी उपस्थिति न केवल राहत दे सकती है, बल्कि लोगों में आशा भी जगा सकती है। 


जयराम ठाकुर की चुप्पी


एक दिन पहले जब विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर से कंगना के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में न पहुंचने के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनकी यह चुप्पी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि आपदा के इस गंभीर समय में जनप्रतिनिधियों से सक्रिय और त्वरित भूमिका की अपेक्षा की जा रही है। लोगों का मानना है कि ऐसे संकट में नेताओं को सामने आकर प्रभावितों का समर्थन करना चाहिए, और इस मुद्दे पर जयराम ठाकुर का मौन कई सवाल खड़े कर रहा है।

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