Sunday, May 3, 2026
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भारत ने लिया ऐसा फैसला, अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान

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नई दिल्लीजम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना की के तार पाकिस्तान के साथ जुड़े हुए है। हमले के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS)एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता पीएम मोदी ने की। साथ ही इस बैठक में पाकिस्तान पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए है। इसी कड़ी में सिंधु जल समझौते को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का फैसला लिया गया।


भारत के इस फैसले से पाकिस्तान में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पाकिस्तान में कृषि करने के लिए लगभग 80% पानी सिंधु, झेलम, और चिनाब नदियों से आता है। लगभग47 मिलियन एकड़ से अधिक भूमि को पानी प्रदान करती हैं। पानी की कमी से फसल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे खाद्य संकट और आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। इसके साथ ही पाकिस्तान के कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (जैसे, नीलम-झेलम प्रोजेक्ट) इन नदियों पर निर्भर हैं। पानी की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे पहले से मौजूद ऊर्जा संकट गहराएगा।


भारत के इस फैसले से पाकिस्तान के कई राज्यों में पानी के पानी की किल्लत हो सकती हैं। जैसे पंजाब और सिंध प्रांतों में लाखों लोग पीने के पानी के लिए इन नदियों पर निर्भर हैं। पानी की आपूर्ति रुकने से जनजीवन पर गंभीर असर पड़ेगा। पानी की कमी से कृषि और औद्योगिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं, जिससे पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था और चरमरा सकती है।


सिंधु जल समझौता क्या है?


सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ एक ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौता है, जिसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों (सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब, झेलम) के पानी का दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण बंटवारा करना था।


प्रमुख प्रावधान


पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज):


इनका नियंत्रण भारत को दिया गया, जिनका कुल वार्षिक प्रवाह लगभग 41 अरब घनमीटर है। भारत इनका पूर्ण उपयोग कर सकता है।


पश्चिमी नदियां (सिंधु, चिनाब, झेलम):


इनका नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया, जिनका वार्षिक प्रवाह लगभग 99 अरब घनमीटर है। भारत इनका उपयोग गैर-उपभोगी उद्देश्यों (जैसे, जलविद्युत, सिंचाई के लिए सीमित मात्रा) के लिए कर सकता है, लेकिन पानी को रोकने या मोड़ने की अनुमति नहीं है।


पानी का बंटवारा


कुल पानी का लगभग 80% पाकिस्तान को और 20% भारत को आवंटित है। भारत को पश्चिमी नदियों पर 3.6 मिलियन एकड़-फीट पानी संग्रह करने की अनुमति है।


 

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