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चीन के विदेश मंत्री वांग यी और PM मोदी की मुलाकात, सीमा शांति और सहयोग पर हुई चर्चा

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India-China Relation: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार 19अगस्त को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई, जिसे भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने और सीमा विवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। बता दें, यह मुलाकात बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन से पहले हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के 31अगस्त से 01सितंबर तक चीन के तियानजिन में भाग लेंगे। 


प्रधानमंत्री मोदी और वांग यी की मुलाकात


जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वांग यी की मुलाकात मंगलवार शाम 5:30बजे हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को और मजबूत करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा की। यह मुलाकात इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद को दर्शाती है, जो 2020के बाद से तनावपूर्ण रहे संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।


इस बैठक के बारे में जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा ‘विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई। पिछले साल कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मेरी मुलाकात के बाद से, भारत-चीन संबंधों में एक-दूसरे के हितों और संवेदनशीलता के सम्मान के साथ निरंतर प्रगति हुई है। मैं शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में होने वाली हमारी अगली मुलाकात का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं। भारत और चीन के बीच स्थिर, विश्वसनीय और रचनात्मक संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


भारत-चीन का सीमा विवाद?


दरअसल, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से एक जटिल मुद्दा रहा है। साल 1962के युद्ध, डोकलाम गतिरोध (2017) और 2020में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा किया। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध अपने निम्नतम स्तर पर पहुंच गए थे। साथ ही, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य तैनाती में भारी वृद्धि देखी गई।


हालांकि, पिछले कुछ सालों में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर सहमति एक सकारात्मक कदम थी।

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