Friday, May 8, 2026
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एनआर मंडल में हित निरीक्षक की परीक्षा हुई निरस्त विभाग से भरा जाना है पद

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लखनऊ। उत्तर रेलवे मंडल में वर्षों से कर्मचारी कल्याण निरीक्षक पद एक बार फिर सुर्खियों में, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सौदा नहीं हो पाया तय मामला यूनियनों से जुड़ा एक अयोध्या कैंट का एक चर्चित बाबू संदेह के घेरे में ऐंठा मोटी रुपया दिखाया बाबू एवं यूनियन का जलवा।
मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ मंडल में हित निरीक्षक की लगभग आधा दर्जन से अधिक पद विगत कई वर्षों से रिक्त चल रहा है और उक्त पद इस लिए नहीं भरा जा रहा है कि इन भ्रष्टाचारियों के मनमाफिक कोई वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी नहीं आ रहा है और लखनऊ मंडल के सबसे तेज तर्रार वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अमित पांडेय काफी व्यवहार कुशल एवं ईमानदार बताये जाते हैं सबसे मजे की बात तो ये है उक्त वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी भ्रष्ट नेताओं का सुनता ही नहीं है और ये भ्रष्टाचारियों का काकस संगठन विगत कई वर्षों से परेशान है और अपने चहेतों से मोटी रकम लेकर हित निरीक्षक की नियुक्ति करवाने का इनके मंसूबों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है क्यों मंडल रेल प्रबंधक सचिन शर्मा भी ईमानदार अधिकारी की श्रेणी में बताए जाते हैं। आईए बताते हैं असली वजह विगत लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक एवं तत्कालीन सीडीपीओ बबल यादव के कार्य काल में दो बार परीक्षा की तारीख निर्धारित होकर निरस्त हो चुकी है क्योंकि यूनियन का एक नेता तथा कर्मचारियों का भ्रषटारी देवता सौदा तय किया और जमकर वसूली भी किया लेकिन लखनऊ से प्रकाशित दैनिक ‘ हिंदमोर्चा ‘ ने दो बार खबर चलाई जिसके फलस्वरूप प्रशासन को परीक्षा निरस्त करानी पड़ी। अबकी बार कहानी कुछ और बयां कर रही अयोध्या कैंट का एक इंजीनियरिंग विभाग का एक बाबू जिसकी नियुक्त मृतक आश्रित कोटा अवैध ढंग से होना बतायी जाती है खुलेआम एक यूनियन के नेता के दबाव में मनमानी किया और मोटी रकम ऐंठी ये वही बाबू है जिसकी गैंगमैन के पद पर नियुक्त हुआ था और इसके पिता की सेवा पुस्तिका में भी फेरबदल करके इसकी नियुक्ति हुई इसके बाद ये एक नेता की कृपा से बाबू बन बैठा और फिर इसकी तूती बोलने लगी। रेलवे के आधा दर्जन कर्मचारियों ने बताया कि यह भर्ती विगत कई वर्षों से जालसाजों के लिए चुनौती बनी हुई है बहुत से योग्य कर्मचारियों ने हित निरीक्षक का फार्म भरा था उनके फार्म ही बाबू ने गायब करवा दिया और फार्म सबमिट ही नहीं करने दिया जब कि उक्त बाबू अयोध्या कैंट सहायक मंडल अभियंता के यहां से कुछ कर्मचारियों ने खुद अप्लाई किया था लेकिन उनका फार्म आफिस का बाबू द्बारा भेजा ही नहीं गया जिससे वे परीक्षा देने से वंचित रह गये और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया।जबकि यह खेल लखनऊ मंडल में कोई नया नहीं है जबकि कर्मचारियों ने इसकी शिकायत भी किया लेकिन मामला टांय टांय फिस हो गया।जबकि अयोध्या कैंट का सीनियर सेक्शन इंजीनियर का बाबू आए दिन विवादों में रहता चूंकि इसका घर गोसाईंगंज पड़ता है ये कभी महिलाओं के साथ अभद्रता करने अथवा एलाउंस का समय पर भुगतान न करना कर्मचारी बृजेन्द्र सिंह मीणा सहित तमाम कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर जारी है जब कि रेल प्रशासन अपनी कमी को छिपाने के लिए तकनीकी कमी का हवाला दे रहे हैं। इसके पीछे एक ऐसा नेता है जो खुद विवादित अपनी सेवा पुस्तिका गायब करवा दिया और फेरबदल करने का खेल किया गजब का है ये नेता अपने काले कारनामों को लेकर सदा चर्चित रहता है और वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी से इसका छत्तीस का आंकड़ा है क्योंकि इसका कोई भी अवैध कार्य सीडीपीओ अमित पांडेय नहीं कर रहे हैं।

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