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इस राज्य ने तोड़ दी नक्सलवाद की जंजीर, बना देश का पहला नक्सल मुक्त प्रदेश

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Madhya Pradesh Naxal Free State:लंबे संघर्ष और दृढ़ रणनीति के बाद मध्य प्रदेश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में घोषणा की कि राज्य अब पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो चुका है, जो केंद्र सरकार के मार्च 2026 के लक्ष्य से पूरे तीन महीने पहले है। यह जीत न सिर्फ सुरक्षा बलों की बहादुरी का प्रतीक है, बल्कि उन हजारों निर्दोषों के लिए न्याय की भी है। बता दें, बालाघाट जिले में दो नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद ही यह ऐलान हुआ।


मध्य प्रदेश में नक्सलवाद का काला अध्याय


दरअसल, मध्य प्रदेश में नक्सलवाद की जड़ें गहरी हैं। 1980 के दशक से शुरू हुए इस खतरे ने राज्य के आदिवासी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जैसे जिले नक्सली गतिविधियों का केंद्र बने रहे, जहां विकास कार्य रुक जाते थे और सुरक्षा बलों पर हमले आम हो गए। 1999 में बालाघाट में कांग्रेस के मंत्री लकीराम कावरे की हत्या इसका एक दर्दनाक उदाहरण था। पिछले कुछ दशकों में 38 जवान शहीद हो चुके थे और नक्सली हिंसा ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मध्य प्रदेश ने इसे 2025 के अंत में ही हासिल कर लिया।


42 दिनों में 40 से ज्यादा नक्सलियों का आत्मसमर्पण


लेकिन यह सफलता रातोंरात नहीं मिली, बल्कि लगातार अभियानों और सख्त नीतियों का नतीजा है। पिछले 42 दिनों में 40 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इसके अलावा 08 दिसंबर को बालाघाट में 10 कुख्यात नक्सलियों जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं ने और 11 दिसंबर को बालाघाट के बिरसा थाना क्षेत्र के कोरका में दो और हार्डकोर नक्सली 29 लाख का इनामी दीपक और 14 लाख का इनामी रोहित CRPF कैंप में मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने आत्मसमर्पण किया।


ये लोग कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओइस्ट) के भोरसदेव एरिया कमिटी और महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ जोन के सदस्य थे। उन्होंने आईएनएसएएस राइफल, एके-47, 303 राइफल, एसएलआर और सिंगल-शॉट गन जैसे घातक हथियार जमा कर दिए। इन नक्सलियों पर कुल 2.36 करोड़ रुपये का इनाम था। इन आत्मसमर्पणों ने बालाघाट को भी नक्सल-मुक्त घोषित कर दिया, जिससे राज्य के सभी प्रभावित जिले मुक्त हो गए।


CM मोहन यादव का बयान


तो वहीं, मध्य प्रदेश सरकार की ‘पुनर्वास से पूर्ण जीवन’ योजना ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का आकर्षक विकल्प दिया। आत्मसमर्पण करने वालों को 15 साल तक पुनर्वास पैकेज, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की गारंटी दी गई। साथ ही, अभियान चलाकर बाकी नक्सलियों को चेतावनी दी गई कि आत्मसमर्पण न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर राज्य के CM मोहन यादव ने कहा ‘जो लोग खून बहाने में लगे थे, वे या तो खत्म हो गए या आत्मसमर्पण कर चुके। हमारी नीति साफ थी: या तो आत्मसमर्पण करो और हम तुम्हारा पुनर्वास करेंगे, या फिर हमारा अंतिम ‘लाल सलाम’ लो।’  

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