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हत्याओं का सीजन हैं मई-जून वाले बयान पर ADG कुंदन कृष्णन ने मांगी माफी, किसानों को लेकर दी सफाई

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ADG Apologized On Bihar Crime Statement: बिहार में बढ़ते अपराध और हत्याओं की घटनाओं के बीच बिहार पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) कुंदन कृष्णन ने हाल ही में एक विवादिच बयान दिया था। उन्होंने कहा था ‘अप्रैल, मई और जून के महीनों में बिहार में हत्याओं की संख्या बढ़ जाती है। क्योंकि इस दौरान किसानों के पास कोई काम नहीं होता, जिसके कारण वे अपराध की ओर प्रवृत्त होते हैं।’ इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाओं और किसान संगठनों के विरोध के बाद अब ADG ने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी और सफाई दी कि उनका इरादा किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।


ADG की माफी और सफाई


बिहार में बढ़ते अपराध पर दिए बेतुका बयान पर विवाद बढ़ने के बाद 19जुलाई को बिहार पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक वीडियो बयान जारी किया। जिसमें कुंदन कृष्णन ने माफी मांगी है। उन्होंने कहा ‘मेरे बयान के कुछ अंशों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे विवाद पैदा हुआ। मेरा इरादा किसानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। मैं स्वयं किसान समुदाय से आता हूं, क्योंकि मेरे पूर्वज भी किसान थे। अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं और माफी मांगता हूं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों की कोई जाति या वर्ग नहीं होता और किसान हमेशा सम्मान के पात्र हैं।


क्या था विवादित बयान?


दरअसल, 17जुलाई को ADG कुंदन कृष्णन ने बिहार में हाल के महीनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं, विशेष रूप से हत्याओं, पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था ‘अप्रैल, मई और जून में हत्याएं ज्यादा होती हैं। इस दौरान किसानों के पास खेती का कोई काम नहीं होता, इसलिए वे अपराध में शामिल हो जाते हैं। युवा शूटर बन रहे हैं और सुपारी किलिंग जैसे अपराधों में लिप्त हो रहे हैं।’ उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ समय में बिहार में ‘मर्डर सीजन’ जैसा चलन देखने को मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस बेतुका बयान में किसानों को गुनहगार के रुप में पेश किया गया है।


ADG के बयान पर विवाद


ADG कुंदन कृष्णन के बयान को कई लोगों ने गैर-जिम्मेदाराना और किसानों का अपमान करने वाला बताया। सोशल मीडिया पर लोग इस बयान की तीखी आलोचना कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा ‘ADG साहब किसानों को हत्यारा बता रहे हैं, जबकि बिहार में जंगल राज की स्थिति सरकार और पुलिस की नाकामी का सबूत है।’एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, ‘किसानों को बदतमीज करने की जगह पुलिस को अपराध रोकने पर ध्यान देना चाहिए।’

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