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मेगा मर्जर से ग्लोबल फास्ट-फूड मार्केट में भूचाल, KFC–Pizza Hut की पैरेंट्स कंपनी हुई एकजुट

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KFC–Pizza Hut Merger:नए साल 2026 की शुरुआत में भारतीय फास्ट-फूड इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव आया है। देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड (Devyani International Limited – DIL) और सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड (Sapphire Foods India Limited – SFIL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 01 जनवरी 2026 को मर्जर को मंजूरी दे दी है। यह मर्जर Yum! Brands (KFC और Pizza Hut की ग्लोबल पैरेंट कंपनी के बीच होगा। डील की वैल्यू लगभग $934 मिलियन (करीब ₹7,800 करोड़) बताई जा रही है। इस मेगा मर्जर से न सिर्फ क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में बदलाव होंगे, बल्कि McDonald’s और Domino’s की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।


KFC और Pizza का मर्जर


बता दें, ये मर्जर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, जो 2027 तक जारी रहेगा। इस दौरान देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड हर 100 सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के फूड शेयरों के बदले 177 शेयर जारी करेगी। मर्जर के बाद संयुक्त कंपनी भारत और विदेशों में 3,000+ आउटलेट्स ऑपरेट करेगी, जिसमें KFC, Pizza Hut, Costa Coffee, Vaango, The Food Street का नाम शामिल है। इस मर्जर के जरिए Devyani International 19KFC रेस्टोरेंट्स (हैदराबाद में Yum! India द्वारा सीधे संचालित) भी हासिल करेगी। साथ ही Yum! Brands ने लाइसेंसिंग टर्म्स में संशोधन किया है, जिसमें स्टोर एक्सपैंशन से जुड़ी छूट शामिल है।


मर्जर का मकसद और फायदे


देवयानी इंटरनेशनल के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रवि जयपुरिया ने कहा ‘यह मर्जर हमारी ग्रोथ जर्नी में एक मील का पत्थर है। इससे पूरी भारत में KFC और Pizza Hut के लिए एक सिंगल, यूनिफाइड फ्रैंचाइजी बनेगी। साथ ही श्रीलंका में मजबूत अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी भी मिलेगी।’ तो वहीं, Yum! Brands के CFO रंजीत रॉय ने भारत को हाई-प्रायोरिटी मार्केट बताया और कहा कि यह मर्जर सप्लाई चेन, स्टोर ग्रोथ और लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए एक मजबूत, रेजिलिएंट पार्टनर तैयार करेगा। इस मर्जर से KFC का एक्सपैंशन तेजी से होगा। Pizza Hut को रिवाइव किया जाएगा, जिससे उसे मजबूती मिलेगी। इससे देवयानी इंटरनेशनल के नए ब्रांड्स (Costa Coffee, Vaango आदि) को मदद मिलेगी।


McDonald’s और Domino’s की टेंशन बढ़ेगी?


बता दें, भारत का QSR मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, 2030 तक 11% CAGR की उम्मीद है। लेकिन बढ़ते इंग्रीडिएंट कॉस्ट, रेंट, लेबर और स्लोइंग सेम-स्टोर सेल्स से सभी प्लेयर्स पर दबाव है। इस मर्जर से McDonald’s और Domino’s को भी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।  

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