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छांगुर बाबा ने बुना धर्मांतरण के लिए कोड वर्ड्स का जाल, ऐसे चलता था अवैध नेटवर्क का रैकेट

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Chhangur Baba: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक बड़े अवैध धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। जिसका मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा अपने संगठित नेटवर्क से कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करके इस गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम देता था। यूपी एटीएस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आए कोड वर्ड्स और उनके पीछे छिपे अर्थ ने इस रैकेट की साजिशों को उजागर किया है।


धर्मांतरण की गुप्त भाषा का खेल


UP एटीएस की जांच में छांगुर बाबा की कॉल रिकॉर्डिंग्स और पूछताछ से पता चला कि वह अपने सहयोगियों और एजेंटों के साथ फोन पर कोड वर्ड्स में बात करता था, ताकि उसकी गतिविधियां गोपनीय रहें। जांच में सामने आया कि कोड वर्ड्स में ‘मिट्टी पलटना’ शब्द का प्रयोग किया गया है। इसका मतलब था किसी का धर्म परिवर्तन करवाना। ‘प्रोजेक्ट’ शब्द का प्रयोग किया गया है। ये शब्द लड़कियों को संदर्भित किया गया है, जिन्हें धर्मांतरण के लिए टारगेट किया जाता था।


इसके अलावा ‘काजल करना’ शब्द सामने आया। इसका अर्थ था टारगेट किए गए लोगों को मानसिक रूप से ब्रेनवॉश करना, ताकि वे धर्म परिवर्तन के लिए आसानी से तैयार हो जाएं। ‘दर्शन’ शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता था, जब किसी व्यक्ति को छांगुर बाबा से मिलवाने की बात होती थी। ‘दीदार’ शब्द का प्रयोग भी छांगुर बाबा से मुलाकात को दर्शाता था। खासकर तब जब कोई नया शिकार नेटवर्क में शामिल होने वाला होता था।


छांगुर बाबा का खतरनाक नेटवर्क


बता दें, छांगुर बाबा का असली नाम जमालुद्दीन है। जो बलरामपुर के उटरौला कस्बे में चांद औलिया दरगाह के पास अपनी आलीशान कोठी से इस रैकेट को संचालित करता था। जांच में पता चला कि उसने 50 युवकों की एक ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ तैयार की थी, जो उसके इशारों पर काम करती थी। यह टास्क फोर्स न केवल धर्मांतरण के लिए लोगों को लालच देती थी, बल्कि डर और धमकी का माहौल भी बनाती थी। कुछ मामलों में हिंसा और धमकियों का भी इस्तेमाल किया गया।


जानकारी के अनुसार, छांगुर बाबा ने अपने नेटवर्क को बलरामपुर से लेकर पुणे, राजस्थान, और लखनऊ तक फैलाया था। वह गरीब, वंचित, और बीमार लोगों को निशाना बनाता था। जिन्हें धन, नौकरी या शादी का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था। इसके अलावा, उसने जाति के आधार पर अलग-अलग रेट तय किए थे। ब्राह्मण, क्षत्रिय और सिख लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये। जबकि पिछड़ी जातियों के लिए 10-12 लाख रुपये और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपये। 


प्रशासन की कार्रवाई


छांगुर बाबा की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उसकी अवैध कोठी पर बुलडोजर चलाया, जो सरकारी जमीन पर बनी थी। यह कोठी मधपुर गांव में तीन बीघे जमीन पर बनी थी और इसमें विदेशी सामान और उच्च सुरक्षा व्यवस्था थी। तहसीलदार उटरौला ने सात दिन की मोहलत दी थी। लेकिन विरोध के बावजूद कोठी को ध्वस्त कर दिया गया।

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