हम सभी जानते हैं कि आज से करोड़ों साल पहले हमारी धरती, आकाश और जल तीनों थालों पर डायनासोर, मैमथ जैसे विशालकाय जीवों का राज था। ऐसे ही एक विशालकाय समुद्री जीव का खोपड़ी नुमा जीवाश्म इंग्लैंड के तट पर मिली है। वैज्ञानिकों का अंदाजा है कि यह जीव आज से करीब 15 करोड़ साल पहले अस्तित्व में था जिसे प्लियोसॉर (Pliosaur) के नाम से जानते हैं।
2 मीटर लंबा जीवाश्म अब तक खोजे गए Pliosaur के सभी नमूनों से सबसे संपूर्ण है। वैज्ञानिकों को लगता है कि इससे प्लियोसॉर के बिहेवियर और साइकोलॉजी के बारे में जरूरी जानकारी मिलेगी।
प्लियोसॉर (Pliosaur) क्या है?
प्लियोसॉर समुद्र में रहने वाला एक खूंखार रेप्टाइल था, जो एक चुटकी में अपने शिकार को मसल डालता था। वैसे तो समुद्र में बहुत से खूंखार जीव पाए जाते थे, लेकिन प्लियोसॉर उनमें से सबसे खूंखार जीव था। प्लियोसॉर इतने खतरनाक थे कि वो अपनी ही प्रजाति के प्लियोसॉर्स को भी मार के खा जाते थे। वैज्ञानिक समुद्री जीव प्लियोसॉर की तुलना डायनासोर की प्रजाति से भी करते हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, प्लियोसॉर की खोपड़ी से उसकी विशालकाय आकृति का पता लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट कहती है कि प्लियोसॉर के सामने के दांत लंबे और उस्तरे जैसे नुकीले थे। वह काफी घातक और मांस को काट सकते थे। इस वजह से प्लियोसॉर एक कुशल शिकारी बन गया था।
गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, जीवाश्म की खूबी है कि इसके दर्जनों नुकीले दांत के अवशेष भी अभी बाकी हैं।
मौजूदा खोज में शामिल रहे जीवाश्म विज्ञानी (paleontologist) स्टीव एचेस ने बीबीसी न्यूज को बताया कि यह अब तक के सबसे अच्छे जीवाश्मों में से एक है। यह सबसे अलग है क्योंकि यह पूरा है। जो खोपड़ी मिली है उसकी ज्यादातर चीजें इस जीवाश्म में मौजूद हैं। हालांकि यह जीवाश्म थोड़ा विकृत हो गया है।
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प्लियोसॉर के जीवाश्म पर एक डॉक्युमेंट्री भी तैयार की गयी है, जिसे नए साल 2024 के मौके पर बीबीसी पर टेलीकास्ट किया जाएगा।
इस खोज के बारे में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के डॉ आंद्रे रोवे ने कहा कि वह जानवर इतना विशाल रहा होगा कि वह किसी भी जीव का आसानी से शिकार कर लेता होगा। उन्होंने प्लियोसॉर की तुलना एक खतरनाक डायनासोर की प्रजाति से की।
जीवाश्म विज्ञानी एचेस और उनके दोस्त फिल जैकब्स दक्षिणी इंग्लैंड के जुरासिक तट पर किममेरिज खाड़ी के पास टहल रहे थे, जब उनके सामने यह जीवाश्म आया।
कई महीनों की जांच के बाद वह इसे एक्सप्लोर कर पाए। वैज्ञानिक अब इस जीवाश्म का बाकी हिस्सा तलाशने में जुटे हैं।









