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‘वक्फ इस्लाम का मूल या अनिवार्य हिस्सा नहीं है’ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की दलील

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2024 से संबंधित मामले में अपनी दलीलें दी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि वक्फ इस्लाम का मूल या अनिवार्य हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक दान का रूप है। केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि वक्फ अधिनियम पूरी तरह से वैध है और इसे संसद ने अपनी विधायी शक्तियों के तहत बनाया है। इसके अलावा, सरकार ने 1923 से चली आ रही वक्फ से जुड़ी समस्याओं को नए कानून के माध्यम से हल करने की बात कही है।


 वक्फ संशोधन बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने यह भी आश्वासन दिया था कि वह ‘वक्फ-बाय-यूजर’ संपत्तियों को डिनोटिफाई नहीं करेगा और केंद्रीय वक्फ परिषद या अन्य बोर्डों में नियुक्तियां नहीं करेगा। यह आश्वासन 17 अप्रैल को दिया गया था, हालांकि यह रोक 5 मई तक सीमित थी। इसके अतिरिक्त, एक अन्य मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन न करने पर दिल्ली हाई कोर्ट से फटकार खाई। यह मामला 2006 के विवाह पंजीकरण से संबंधित आदेश से जुड़ा था, जहां हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू क्यों नहीं कर रहा


यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है- केंद्र सरकार


केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि अगर कोई संपत्ति सरकारी हो और उसे वक्फ-बाय-यूज़र के तहत घोषित किया गया हो, तो सरकार उसे वापस लेने का कानूनी अधिकार रखती है। यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

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