Wednesday, May 6, 2026
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Operation Sindoor की रात भारतीय नौसेना ने कराची को घेरा, तबाही के लिए तैयार थे 36 युद्धपोत और पनडुब्बियां

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Operation Sindoor: पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। इस दौरान भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। जब 36 युद्धपोतों, 7 डेस्ट्रॉयरों, स्टील्थ फ्रिगेट्स और पनडुब्बियों सहित एक विशाल नौसैनिक टुकड़ी को कराची के निकट अरब सागर में तैनात किया गया। यह तैनाती भारत की समुद्री ताकत का शानदार प्रदर्शन थी। जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया।


बता दें, भारत की तीनों सेना थलसेना, वायुसेना और नौसेना की भूमिका ऑपरेशन सिंदूर में अहम थी। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में अभूतपूर्व तैनाती की। इसका खुलासा वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने 11 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। इस तैनाती का उद्देश्य पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना था कि भारत किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है।


1971 के युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर


मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर की तुलना 1971 के युद्ध से की जा रही है। जब भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पायथन के तहत कराची बंदरगाह पर हमला किया था। उस समय केवल 6 युद्धपोतों ने पाकिस्तानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया था। जिसमें दो डेस्ट्रॉयर और तेल भंडारण सुविधाएं नष्ट हो गई थीं। ऑपरेशन सिंदूर में 36 युद्धपोतों की तैनाती 1971 की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली थी, जो भारत की बढ़ती नौसैनिक ताकत को दर्शाती है।


दिखा 36 युद्धपोतों का दम


ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती की। INS विक्रांत का भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत है जो 8-10 युद्धपोतों के साथ कैरियर बैटल ग्रुप का नेतृत्व कर रहा था। यह तैनाती 1971 के युद्ध के बाद सबसे बड़ी थी। जब केवल 6 युद्धपोतों ने कराची पर हमला किया था।


इसके अलावा 7 डेस्ट्रॉयर भी शामिल थी। ये ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह-से-हवा मिसाइलों (MRSAM) और वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो से लैस थे, जो सतह, हवाई और पानी के नीचे के खतरों से निपटने में सक्षम थे।


7 स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स हाल ही में शामिल INS तुशिल सहित ये फ्रिगेट्स कराची के पश्चिमी तट पर एक अभेद्य नौसैनिक दीवार बनाकर खड़े थे।


6 पनडुब्बियां: इनका संचालन गुप्त रूप से किया गया, जिसने भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत किया।


फास्ट अटैक क्राफ्ट्स और मिसाइल बोट्स: ये छोटे लेकिन घातक जहाज नौसेना की ताकत को और बढ़ाते थे।

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