जालौन में कालपी बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट गयादीन अहिरवार की किडनैपिंग और मर्डर को लेकर परिवार वालों और वकीलों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। कालपी थाना इंचार्ज को सोमवार देर रात सस्पेंड कर दिया गया। मंगलवार को वकीलों ने कालपी शहर में मार्च निकालकर विरोध जताया और SDM को मेमोरेंडम दिया।
उन्होंने CBI जांच, परिवार को 5 करोड़ रुपये का मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बुधवार तक मुख्य आरोपी मोनू यादव को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वकील सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
वकीलों ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भी विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, पुलिस के काम करने के तरीके पर उठते सवालों के बीच, पुलिस सुपरिटेंडेंट सुरेश चंद्र रावत ने सोमवार देर रात कालपी थाना इंचार्ज अजय ब्रह्मा तिवारी को सस्पेंड कर दिया। उनकी जगह राजेश कुमार सिंह को थाने पर अपॉइंट किया गया है।
इसके अलावा, फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने और केस में तेजी लाने के लिए एक SWAT टीम बनाई गई है। इसमें SI अशोक कुमार, निरंजन सिंह, अमरनाथ शर्मा, अजीत कुमार गौतम, मनोज कुमार और रवि कुमार शामिल हैं।
SP सुरेश चंद्र रावत ने कहा कि थाना प्रभारी के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। लाइन हाजिरी का मतलब सस्पेंशन या सज़ा की कार्रवाई नहीं है, बल्कि अधिकार क्षेत्र में बदलाव है। पुलिस फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।
1 हजार रुपये की फीस में फंसाया
साजिश के तहत मोनू अपने साथी के साथ वकील गयादीन के पास पहुंचा। उसने उनसे कहा, “अंकल, मैं एक गंभीर केस में फंसा हुआ हूं। केस रामपुरा में चल रहा है। प्लीज इसे किसी तरह सुलझा लें।” उसने वकील से अपनी तरफ से केस लड़ने और मदद करने को कहा। फिर उसने कहा, “अंकल, मैं दो दिन में वापस आऊंगा। तब तक प्लीज 1 हजार रुपये की फीस ले लो और मेरी फाइल तैयार कर लो।” इस बातचीत के बाद वकील को शायद इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि मदद मांगने की आड़ में उसके इर्द-गिर्द जाल बुना जा रहा है।


