केंद्र सरकार की लखपति दीदी पहल उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए चलाई जा रही है। इसका मकसद महिलाओं को रोज़गार और स्व-रोज़गार के मौके देकर परिवार की आमदनी बढ़ाना है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, 30 जून, 2025 तक उत्तर प्रदेश में 1,115,982 महिलाएं लखपति दीदी के तौर पर रजिस्टर्ड थीं। यह डेटा सेल्फ़-हेल्प ग्रुप से मिली जानकारी पर आधारित है।
लखपति दीदी योजना क्या है?
लखपति दीदी पहल केंद्र सरकार की दीनदयाल अंत्योदय योजना-नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (DAY-NRLM) का हिस्सा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय इसे राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू करता है। उत्तर प्रदेश में, उत्तर प्रदेश स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (UPSRLM) इस प्रोग्राम की ज़िम्मेदारी संभालता है। इस पहल के तहत, सेल्फ-असिस्ट ग्रुप (SHG) से जुड़ी वे महिलाएं जिनके परिवार की सालाना कमाई कम से कम एक लाख रुपये है, उन्हें लखपति दीदी माना जाता है। यह कमाई लगातार चलनी चाहिए, सिर्फ़ एक बार की कमाई नहीं। कमाई का असेसमेंट कम से कम 4 खेती के मौसम और बिज़नेस साइकिल पर आधारित होता है।
महिलाओं को कैसे फ़ायदा होता है?
लखपति दीदी पहल का मकसद महिलाओं को कमाई के नए रास्ते देना है। उन्हें अपनी रोज़ी-रोटी की प्लानिंग करने, स्किल सीखने, बैंकिंग सर्विस का इस्तेमाल करने और लोन लेने में मदद की जाती है। उनके प्रोडक्ट्स को मार्केट करने के मौके देने पर भी ज़ोर दिया जाता है। लड़कियां खेती, पशुपालन, खेती के दूसरे काम, छोटी कंपनियों और सर्विस सेक्टर से अपनी कमाई बढ़ा सकती हैं। इससे उन्हें अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने और अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिलता है।
लाखों लड़कियां सेल्फ-असिस्ट टीम से जुड़ रही हैं
नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन के तहत, पूरे देश में लड़कियों को सेल्फ-असिस्ट टीम के ज़रिए ऑर्गनाइज़ किया जा रहा है। जून 2025 तक, मिशन में 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में 9 मिलियन से ज़्यादा सेल्फ-हेल्प टीम शामिल थीं। इन टीमों में 100 मिलियन से ज़्यादा ग्रामीण लड़कियां थीं। सेल्फ-हेल्प टीम के साथ, मिशन में गांव के संगठन और क्लस्टर-लेवल के फेडरेशन भी शामिल हैं, जो लड़कियों को फाइनेंशियल और सोशल मदद देते हैं। लखपति दीदी पहल का पहला मकसद ग्रामीण महिलाओं की इनकम को लगातार बढ़ाना, नौकरी के मौके बनाना और उन्हें पैसे से जुड़े फैसले लेने में मदद करना है।


