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हरदीप पुरी बीजेपी की राज्यसभा लिस्ट से बाहर, बताया यूपी चुनाव और स्थानीय समीकरण वजह

यूपी से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों की लिस्ट से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम हटाने के बीजेपी के फैसले को राजनीतिक हलकों में हैरानी और दिलचस्पी से देखा जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ कथित संबंधों को लेकर विपक्ष ने पुरी पर निशाना साधा था, जिसके ठीक बाद हुए इस फैसले ने राजनीतिक हलकों को चौंका दिया है।

विपक्ष के नेताओं का कहना है कि उन्हें पता था कि आखिरकार पुरी को हटा दिया जाएगा, और राज्यसभा सीट न मिलने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में उनके बने रहने पर सवालिया निशान लग गया है। वहीं, बीजेपी नेता इस कदम को 2027 में होने वाले अहम यूपी चुनावों से पहले एक राजनीतिक ज़रूरत बता रहे हैं।

बीजेपी के एक नेता ने कहा, “अन्य बातों की तुलना में स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता दी गई है। यूपी से चुने गए सभी आठ उम्मीदवार ज़मीनी स्तर के नेता हैं, जिनका राजनीतिक प्रभाव है और जो स्थानीय हितों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज़ाहिर है, यूपी चुनाव की रणनीति और जीत की संभावनाओं पर चर्चा के बाद किसी और के लिए कोई जगह नहीं बची थी।” उन्होंने यह भी बताया कि पुरी और यूपी के एक अन्य मंत्री बीएल वर्मा समेत सभी मौजूदा सांसदों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया गया है।

राज्य इकाई ने पहले राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर विचार करने के लिए 22 नेताओं का एक पैनल भेजा था। इस पैनल में पुरी और हाल ही में नियुक्त राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी का नाम शामिल था। सूत्रों का कहना है कि ईरानी ने अभी-अभी कार्यभार संभाला है और उन्हें कभी भी राज्यसभा भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी महासचिवों का राज्यसभा सांसद होना ज़रूरी नहीं है। एक और अहम महासचिव जो राज्यसभा में नहीं हैं, वे सुनील बंसल हैं, जिन्होंने हाल ही में पश्चिम बंगाल में पार्टी को जीत दिलाई है।

मोदी कैबिनेट में शामिल एकमात्र सिख चेहरे पुरी के बारे में सूत्रों का कहना है कि कानून के मुताबिक, 25 नवंबर को राज्यसभा से रिटायर होने के बाद भी वे छह महीने तक कैबिनेट में बने रह सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर सिख समुदाय का मुद्दा अहम है, तो पंजाब चुनाव तक उन्हें पद पर बनाए रखा जा सकता है। नेताओं ने कहा कि यह फैसला पीएम मोदी को करना है; पुरी कैबिनेट में बने रह सकते हैं या फिर उन्हें भी अपने उन साथियों की तरह इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है जिन्हें राज्यसभा के लिए दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया और बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

राजस्थान से कार्यकाल खत्म होने के बाद रवनीत बिट्टू को दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया, और न ही जॉर्ज कुरियन को। इस साल जून में कार्यकाल खत्म होने के बाद दोनों ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। एपस्टीन मामले में आरोप लगने पर बीजेपी ने पुरी का बचाव किया था। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा नॉमिनेशन में उनका नाम न होना पार्टी की उस रणनीति के तहत देखा जाना चाहिए जिसमें राज्यों पर ध्यान देना, विधानसभा चुनाव जीतना, स्थानीय टैलेंट को बढ़ावा देना और पुराने नेताओं के बजाय नई लीडरशिप तैयार करना शामिल है।

सोमवार की लिस्ट पर पीएम मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छाप साफ दिखती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगे चलकर बीजेपी को अहम भूमिकाओं में क्षेत्रीय टैलेंट को बढ़ावा देकर स्थानीय संगठनों को मजबूत करना होगा, क्योंकि चुनावी दायरा सीमित है। पार्टी सहयोगियों की मदद से संसद में अपनी ताकत बनाए रखती है। राज्यों में उसे अच्छा प्रदर्शन करना होगा और जीत हासिल करनी होगी ताकि चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे हमलों के बीच चुनावी गुंजाइश बनाई जा सके।

एक बीजेपी सूत्र ने पुरी और अन्य नेताओं को हटाए जाने की वजह बताते हुए कहा, “यूपी जीतना बहुत जरूरी है और आप ऐसे नेता को यूपी से नॉमिनेट नहीं कर सकते जो यूपी का रहने वाला न हो।” नए नॉमिनेट किए गए सभी नेता अपनी-अपनी जाति और समुदाय के जाने-माने नेता हैं और वे समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की PDA (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति का मुकाबला करने में बीजेपी की मदद करेंगे।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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