आगरा में ड्रग डिपार्टमेंट के सर्वे में कई संदिग्ध मेडिकल बिजनेस का पता चला है। इनके पास गोदाम या ऑफिस नहीं हैं, लेकिन ये कागजों पर चल रहे हैं। ऐसी कंपनियों की लिस्ट बनाकर उनकी जांच की जा रही है। अगर डमी कंपनियां पाई गईं, तो उनके लाइसेंस कैंसिल कर दिए जाएंगे।
फूड सिक्योरिटी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब ने हाल ही में नकली, सरकारी और सैंपल दवाओं की तस्करी का पता लगाया था। इसके बाद, होलसेल दवा डीलरों की जांच की जा रही है। जिले में करीब 3,000 होलसेल दवा डीलर हैं, जिनमें से करीब 450 की जांच हो चुकी है। इनमें से 70 से 80 मेडिकल बिजनेस बंद पाए गए हैं।
गोदाम, प्रतिष्ठानों और ऑफिसों के पते भी गलत हैं। उनके ऑपरेटरों के फोन नंबर भी गायब हैं। इसलिए, लोकल दवा डीलरों से उनके GST नंबर, पते और दूसरी जानकारी मांगी जा रही है।
ड्रग इंस्पेक्टर नीलेश शर्मा का कहना है कि होलसेल दवा बेचने वालों का सर्वे चल रहा है। एजेंसी का नाम, पता, ऑपरेटर का नाम, सेलफोन नंबर, वेयरहाउस का पता और दूसरी डिटेल्स की जांच की जा रही है। कई कंपनियां लंबे समय से बंद हैं।
जांच पूरी होने पर उनके लाइसेंस कैंसिल कर दिए जाएंगे। इसके अलावा, अगर किसी फर्म ने अपना फार्मास्यूटिकल ऑपरेशन बंद कर दिया है, तो वह अपना लाइसेंस डिपार्टमेंट को सरेंडर कर सकती है।


