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20 लाख कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, सुप्रीम कोर्ट ने 25% DA देने का दिया आदेश

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Supreme Court on DA Verdict, West Bengal: पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के लगभग 20लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए 2008से 2019तक के बकाया महंगाई भत्ता (DA) के भुगतान का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है और इसे ROPA (Revision of Pay and Allowances) नियमों के अनुसार All India Consumer Price Index (AICPI) के आधार पर तय किया जाना चाहिए।


यह फैसला 05फरवरी को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनाया। दरअसल, राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के 2022के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर DA देने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने DA को कर्मचारियों का अधिकार माना था और बकाया भुगतान का आदेश दिया था। यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखा है।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?


कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार बाद में जारी ऑफिस मेमोरेंडम से DA की गणना के तरीके को नहीं बदल सकती। DA को AICPI (1982=100) के आधार पर ही तय किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि DA साल में दो बार देने की मांग को खारिज कर दिया और इसे फंडामेंटल राइट के रूप में मानने पर विचार नहीं किया।


कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि कर्मचारियों को 2008से 2019तक का पूरा बकाया DA मिलेगा। इसके अलावा कुल बकाया राशि का कम से कम 25%हिस्सा 6मार्च 2026तक जारी किया जाए। साथ ही, कुल बकाया राशि का कम से कम 25%हिस्सा 6मार्च 2026तक जारी किया जाए। शेष 75%की किश्तों में भुगतान के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो भुगतान की समय-सारिणी तय करेगी।


क्या है पूरा मामला?


बता दें, यह विवाद लंबे समय से चल रहा था। राज्य कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह DA (वर्तमान में केंद्र में 55-60% के आसपास) की मांग कर रहे थे, जबकि पश्चिम बंगाल में फिलहाल 18% DA दिया जा रहा है (अप्रैल 2025 से 4% बढ़ोतरी के बाद)। कर्मचारियों ने 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां उनके पक्ष में फैसला आया। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन कोर्ट ने कर्मचारियों के हक को बरकरार रखा।

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