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दिल्ली-UP में नहीं…इस राज्य में तैयार हो रहा देश का पहला Electric Highway, जानें इसके फायदे और फीचर्स

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Electric Highway in Maharashtra: महाराष्ट्र ने ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश के पहले इलेक्ट्रिक हाईवे कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया है। यह कॉरिडोर मुंबई और पुणे के बीच स्थापित किया गया है, जो फ्रेट ट्रांसपोर्ट यानी माल परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी शुरुआत की, जिसके साथ ही ब्लू एनर्जी मोटर्स की ओर से पहला मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक हेवी-ड्यूटी ट्रक भी लॉन्च किया गया। यह प्रोजेक्ट न केवल उत्सर्जन कम करेगा बल्कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर को कुशल और सस्ता बनाएगा।


मुंबई-पुणे के बीच इलेक्ट्रिक हाईवे कॉरिडोर


महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इस इलेक्ट्रिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। यह देश का पहला ऐसा हाईवे है जो इलेक्ट्रिक वाहनों, खासकर फ्रेट ट्रकों के लिए डिजाइन किया गया है। कॉरिडोर मुंबई से पुणे तक फैला है, जहां प्रमुख स्थानों पर चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। यह महाराष्ट्र की ग्रीन इंडस्ट्रियल ग्रोथ और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।


टेक्नोलॉजी और फीचर्स


इस हाईवे की सबसे बड़ी खासियत बैटरी स्वैपिंग टेक्नोलॉजी है, जो ट्रकों को लंबी चार्जिंग ब्रेक के बिना अनलिमिटेड रेंज प्रदान करती है। ब्लू एनर्जी मोटर्स के इलेक्ट्रिक ट्रक में यह सुविधा दी गई है, जहां एक बैटरी पर 400किलोमीटर तक की रेंज मिलती है, जो वर्तमान में 200किमी से दोगुनी है। ट्रक की पेलोड क्षमता सबसे ज्यादा है और इसमें एडवांस्ड मोबिलिटी इंटेलिजेंस सिस्टम लगा है, जो फ्लीट की रिलायबिलिटी बढ़ाता है।


इसके अलावा ‘एनर्जी-एज-ए-सर्विस’ मॉडल अपनाया गया है, जिसमें बिजली, बैटरी और ऑपरेशनल कॉस्ट को प्रति किलोमीटर रेट (लगभग 25रुपये) में शामिल किया जाता है। इससे अपफ्रंट कैपिटल कॉस्ट कम होती है और टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप (TCO) डीजल ट्रकों से कम हो जाता है। प्रत्येक स्वैप स्टेशन की लागत करीब 0.5मिलियन डॉलर है और देशभर में 1,200ऐसे स्टेशन बनाने की योजना है। ट्रक की कीमत डीजल वाहनों से प्रतिस्पर्धी है और यह रिन्यूएबल एनर्जी से चलते हैं, जो वेल-टू-व्हील ग्रीन ऑपरेशंस सुनिश्चित करता है।


पर्यावरण और इकोनॉमी पर असर


बता दें, यह कॉरिडोर फ्रेट ट्रांसपोर्ट से होने वाले उत्सर्जन को कम करेगा, जो भारत के नेट जीरो गोल को सपोर्ट करेगा। लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए यह निर्बाध और सस्टेनेबल ऑपरेशन प्रदान करेगा, क्योंकि बैटरी स्वैपिंग से डाउनटाइम न्यूनतम होता है। महाराष्ट्र पहले से ही 1,000से ज्यादा LNG ट्रकों का संचालन कर रहा है और ग्रीन ट्रक मार्केट में 60%शेयर रखता है। यह प्रोजेक्ट पुणे को ग्रीन लॉजिस्टिक्स हब बनाएगा और अन्य राज्यों के लिए ब्लूप्रिंट बनेगा।


मालूम हो कि महाराष्ट्र सरकार ने ब्लू एनर्जी मोटर्स के साथ MoU साइन किया है, जिसके तहत चाकन, पुणे के पास 3,500 करोड़ रुपये के निवेश से नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनेगा। यह प्लांट शुरुआती चरण में 30,000 इलेक्ट्रिक और LNG ट्रकों का उत्पादन करेगा, जिसमें R&D सेंटर, 1.7 GWh बैटरी पैक प्रोडक्शन लाइन और मोटर यूनिट्स शामिल होंगे।

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