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अरावली विवाद पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आया बयान, बोले- भ्रम फैलाया जा रहा

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Aravalli Controversy: अरावली हिल्स की सुरक्षा को लेकर देश में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने के लिए अरावली की परिभाषा में बदलाव किया गया। कांग्रेस का कहना है कि इससे अरावली क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। इसी मुद्दे पर सोमवार, 22 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लेकर अपना बयान जारी किया है।


भूपेंद्र यादव का बयान


केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है और इसके संरक्षण को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को लेकर गलत तरीके से भ्रम फैलाया गया। मंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद कोर्ट का फैसला पढ़ा है और उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि अरावली को बचाने और इसे आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।


भूपेंद्र यादव ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अरावली की पहाड़ियां बढ़ी है, कम नहीं हुई हैं। खासतौर पर हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में अरावली क्षेत्र को मजबूत किया गया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के ग्रीन बेल्ट को विकसित करने और हरियाली बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है।

खनन की कोई अनुमति नहीं- केंद्रीय मंत्री


खनन के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एनसीआर क्षेत्र में खनन की कोई अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश में जिस “टॉप मीटर” का जिक्र किया गया है, वह केवल न्यूनतम स्तर तय करने से जुड़ा है। इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि खनन को मंजूरी दी गई है। उन्होंने दो टूक कहा कि फैसले में ये भी साफ लिखा है कि नई खनन लीज नहीं दी जाएगी।


पर्यावरण मंत्री ने आगे कहा कि अरावली का जो कोर एरिया है, वहां पहले भी खनन की अनुमति नहीं थी और आगे भी नहीं होगी। सरकार अरावली की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबंध है और किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। भूपेंद्र यादव ने आंकड़ों के जरिए भी स्थिति स्पष्ट की अरावली पर्वतमाला का कुल क्षेत्र लगभग 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से सिर्फ 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही खनन की पात्रता हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब साफ है कि अरावली का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित और संरक्षित है।

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