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SIR से डर के साये में बंगाल! TMC नेता कुणाल घोष बोले – लोग कर रहे सुसाइड, जिम्मेदार बीजेपी


SIR Controversy West Bengal: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया ने न केवल वोटर लिस्ट में बदलाव का वादा किया है, बल्कि राज्य में एक अजीबो-गरीब भय का माहौल पैदा कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रवक्ता कुणाल घोष ने बीजेपी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी ‘अमानवीय राजनीति‘ और चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत से लोग इतने डरे हुए हैं कि सुसाइड के मामले सामने आ रहे हैं। घोष ने बीजेपी के तीन वरिष्ठ नेताओं सुकांत मजूमदार, समिक भट्टाचार्य और शुवेंदु अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि SIR के नाम पर “साइलेंट रिगिंग” हो रही है, जिससे हजारों वैध वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं।


यह विवाद तब भड़का जब 27अक्टूबर को चुनाव आयोग ने SIR की घोषणा की, जो 2002की वोटर लिस्ट के आधार पर मतदाता सूची का सत्यापन करेगी। TMC इसे NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) का छिपा रूप बता रही है, जबकि बीजेपी इसे अवैध घुसपैठियों को हटाने का जरूरी कदम। लेकिन घोष के अनुसार ‘बीजेपी की राजनीतिक साजिश से पहले ही वोटर लिस्ट में हेरफेर शुरू हो गया है। अशोकनगर में सॉफ्ट कॉपी में 900नाम गायब हैं और 2002की हार्ड कॉपी से डिजिटल वर्जन में भारी अंतर है।’


SIR को लेकर बंगाल में आरोप- प्रत्यारोप


बता दें, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना है, खासकर उन नामों को हटाना जो फर्जी या पुराने हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह 2026के विधानसभा चुनावों से पहले पारदर्शिता लाएगी। लेकिन TMC का दावा है कि यह बीजेपी की साजिश है, जो अल्पसंख्यकों, मातुआ समुदाय और गरीब वोटरों को निशाना बना रही है। घोष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज दिखाते हुए कहा ‘बीजेपी कार्यालयों से ही यह ऑपरेशन चल रहा है। वे पहले से जानते हैं कि लाखों नाम कटेंगे, क्योंकि वे इसे ‘चुपके-चुपके’ कर रहे हैं।’


दूसरी तरफ, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए TMC पर ही पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि TMC खुद भय का माहौल पैदा कर रही है और SIR केवल वैध दस्तावेज न होने वालों को प्रभावित करेगी। विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी ने इसे TMC का झूठा प्रचार बताया और दावा किया कि यह प्रक्रिया बंगाल की सुरक्षा के लिए जरूरी है।


बंगाल में सुसाइड केस


SIR की घोषणा के 72घंटों के अंदर ही तीन घटनाओं ने राज्य को हिलाकर रख दिया। 27अक्टूबर को पानिहाटी के 57वर्षीय प्रदीप कर ने आत्महत्या कर ली, सुसाइड नोट में लिखा, “NRC जिम्मेदार है मेरी मौत का।” 28अक्टूबर को कूच बिहार के दिनहाटा में 63वर्षीय खैरुल शेख ने जहर खा लिया, SIR के उत्पीड़न के डर से। और 30अक्टूबर को बिरभूम के इलामबाजार में 95वर्षीय खितिश मजुमदार ने अपनी जान दी, परिवार का कहना है कि जमीन गंवाने के भय से।


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा ‘यह बीजेपी की डर, विभाजन और नफरत की राजनीति का नतीजा है। एक 95 साल के बुजुर्ग को अपनी मिट्टी साबित करने के लिए मरना पड़ा तो यह मानवता का अपमान है।’ उन्होंने वादा किया कि TMC NRC का विरोध अंतिम सांस तक करेगी, और कोई वैध नागरिक को बाहरी नहीं ठहराया जाएगा।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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