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नेपाल के बाद अब लद्दाख बना जंग का मैदान, Gen-Z और पुलिस के बीच हिंसक झड़प; CRPF वाहन को बनाया निशाना

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Ladakh Protests: लद्दाख की राजधानी लेह में 24 सितंबर को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में निकले छात्रों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। जिसमें प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। यह घटना लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने की लंबे समय से चली आ रही मांगों का नया अध्याय बन गई है। भूख हड़ताल के 15वें दिन दो प्रदर्शनकारियों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भड़की यह आगजनी और पथराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव की लहर दौड़ा दी है।


लेह में हालात हुए बेकाबू


आज सुबह के समय लेह अपेक्स बॉडी के बैंड के आह्वान पर छात्रों ने ‘लद्दाख को राज्य बनाओ’ और ‘वादाखिलाफी बंद करो’ जैसे नारे लगाते हुए BJP कार्यालय की ओर मार्च किया। भीड़ बढ़ते ही स्थिति बेकाबू हो गई। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। झड़प के दौरान CRPF की एक वाहन को निशाना बनाया गया, जहां आग लगा दी गई।


इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि काली धुंध के बीच जलती हुई गाड़ी से लपटें उठ रही हैं, जबकि प्रदर्शनकारी चारों ओर भाग रहे हैं। BJP कार्यालय के बाहर भी हिंसा हुई, जहां भीड़ ने तोड़फोड़ की कोशिश की। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, लेकिन इससे तनाव और बढ़ गया।


क्या है पूरा मामला?


बता दें, सोनम वांगचुक ‘थ्री इडियट्स’ फिल्म के प्रेरणा स्रोत के रूप में भी जाने जाते हैं, जो लंबे समय से लद्दाख की पारिस्थितिक और सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 10 सितंबर को उन्होंने लेह में 35 दिनों की अनशन की घोषणा की थी, जिसमें मुख्य मांगें हैं लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना और स्थानीय जनजातियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का वादा किया था, लेकिन छह साल बाद भी ये वादे अधूरे हैं।


कार्यकर्ता और स्थानीय संगठन जैसे लेह अपेक्स बॉडी का कहना है कि बिना संवैधानिक सुरक्षा के लद्दाख की अनूठी संस्कृति, भाषा और पर्यावरण खतरे में हैं। अनशन के दौरान दो स्थानीय निवासियों की हालत बिगड़ने से नया प्रदर्शन भड़क उठा, जिसमें युवा पीढ़ी (जेन जेड) ने आगे आकर सड़कों पर उतरने का फैसला लिया।

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