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वृंदावन से पाकिस्तान तक…विदेशों में भी फैली श्री बांके बिहारी मंदिर की संपत्ति, SC द्वारा होगा ऐतिहासिक सर्वे!


Bankebihariji’s Property: वृंदावन के प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर की अथाह संपत्ति अब सुप्रीम कोर्ट की नजरों में आ रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रबंधन समिति ने चल-अचल संपत्तियों का विस्तृत सर्वे शुरू करने का फैसला लिया है, जिसमें वृंदावन से लेकर विदेशों तक फैली अनगिनत धरोहरों की सूची तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान बांकेबिहारी की संपत्ति न केवल भारत तक सीमित है, बल्कि पाकिस्तान जैसे देशों में भी मौजूद है। यह खुलासा मंदिर की प्राचीन परंपराओं और दान-पत्रों से जुड़े ग्रंथों से होता है।


इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, भगवान के प्राकट्य काल से लेकर आज तक भक्तों ने भूमि, भवन, मंदिर, खेत और कीमती आभूषण दान किए हैं। इसमें हिंदू राजाओं के साथ-साथ मुस्लिम नवाबों के नाम भी शुमार हैं। दुर्भाग्य से, प्रबंधकीय लापरवाही और सामाजिक उदासीनता के कारण ये अरबों रुपये की संपत्तियां अपने संरक्षण का इंतजार कर रही हैं।


प्राचीन ग्रंथों में दर्ज अनसुनी कहानियां


मंदिर की इन धरोहरों का प्रमाण विभिन्न पुस्तकों और अभिलेखों में स्पष्ट रूप से उपलब्ध है। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्रकाशित ‘श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ’, ‘केलिमालजु’, ‘कृपा कोर’, ‘कथा हरिदासबिहारी की’, ‘मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर’ और ‘ब्रजभूमि इन मुगल टाइम्स’ जैसे स्रोतों में इनका वर्णन मिलता है। गोस्वामी समाज की नई पीढ़ी को इन ऐतिहासिक संपत्तियों की जानकारी न होने का दुखद कारण इनकी अनदेखी ही है। प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास जी महाराज के वंशजों की ये संपत्तियां देश-विदेश में बिखरी पड़ी हैं, जो अब पारदर्शी संरक्षण की बाट जोह रही हैं। यह सर्वे न केवल इनकी सूचीबद्धता करेगा, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम भी उठाएगा।


दान की अनुपम परंपरा: गांवों से आभूषण तक


इतिहास गवाह है कि भगवान बांकेबिहारी को भेंट चढ़ाई गई संपत्तियां आश्चर्यजनक रूप से विविध हैं। 1592में जयपुर के सवाई मानसिंह ने तीन एकड़ जमीन दान की, तो 1594में मुगल बादशाह अकबर ने वृंदावन और राधाकुंड में 25बीघा भूमि भेंट की। 1595में हरिराम व्यासात्मज किशोरदास ने किशोरपुरा का भूखंड, 1596में मित्रसेन कायस्थ और उनके पुत्र बिहारिनदास ने बिहारिनदेव टीलावाली भूमि दी। 1748में जयपुर के ईश्वरीसिंह ने 1.15एकड़, 1769में भरतपुर-करौली सरकार ने भूमि, 1780में विंध्याचल राजपरिवार ने जमीन व आभूषण, 1785में ग्वालियर रियासत ने भवन-भूमि और आभूषण चढ़ाए।


1960 में राजस्थान के भक्तों ने कोटा में 90बीघा जमीन, तो 2005में कोलकाता के एक भक्त ने वृंदावन में अपना मकान दान किया। गांवों की बात करें तो 1440 के आसपास मुल्तान के चरणोदक नगर में विष्णुदेवजी को घर-खेत, 1485 में गजाधरजी को शाह हुसैन ने पांच गांव, और 1525 में आशुधीरजी को गुर्जर राजा ने हरिदासपुर समेत पांच गांव दिए। दिल्ली के फराशखाने, पाकिस्तान के मुल्तान, शकर सिंध व सियालकोट में मंदिर-हवेलियां आज भी इस विरासत की गवाही दे रही हैं। यह सर्वे भक्ति की इस अनमोल परंपरा को नई जिंदगी देगा।


 

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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