नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त 2025 को अलास्का में होने वाली बैठक के नतीजों पर भारत के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ सकते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि यदि यह बातचीत असफल रही, तो भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। यह धमकी भारत द्वारा रूस से तेल और हथियार खरीदने के कारण दी गई है, जिस पर अमेरिका पहले ही 25% टैरिफ और 25% जुर्माना लगा चुका है, जो 27 अगस्त से लागू हो सकता है। इस तरह, कुल टैरिफ 50% तक पहुंच सकता है, जिससे भारत अमेरिका के सबसे ज्यादा टैरिफ वाले देशों की सूची में शामिल हो गया है।
अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे वैश्विक बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है, जिससे यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है। भारत ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतों के लिए आवश्यक है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह आयात वैश्विक बाजार की मजबूरी है और अमेरिका ने भी शुरू में इसे प्रोत्साहित किया था।
भारत का प्लान-बी तैयार
इसके जवाब में, भारत ने ‘प्लान-बी’ पर काम शुरू कर दिया है। भारत यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, और लैटिन अमेरिकी देशों जैसे चिली और पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके। इन समझौतों से कपड़ा, दवा, और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा।
ट्रंप-पुतिन का बैठक का उद्देश्य
वहीं, ट्रंप-पुतिन की इस बैठक का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति समझौता करना है, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने साफ किया है कि बिना उनकी भागीदारी के कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। इस स्थिति में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।









