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चुनाव आयोग के नोटिस पर राहुल गांधी का पलटवार, कहा

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Rahul Gandhi Statement: लोकसभा में विपक्ष नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग (ECI) पर वोट चोरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के जवाब में हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर 10 दिनों के अंदर हस्ताक्षरित शपथ पत्र के साथ सबूत पेश करने को कहा। वहीं, अब इस नोटिस पर राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा ‘यह डेटा चुनाव आयोग का है, मेरा नहीं। मैं इस पर हस्ताक्षर क्यों करूं? यह सब मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है।’


राहुल गांधी की प्रतिक्रिया


बता दें, 11 अगस्त सोमवार को राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वाराजारी किए गए नोटिस का जवाब देते हुए कहा ‘यह डेटा मेरा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का है। मैंने जो कहा, वही मेरा हलफनामा है।’ उन्होंने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने की साजिश करार दिया और दावा किया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता से बच रहा है।


राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि जब इंडिया गठबंधन के 300 सांसद एक दस्तावेज सौंपने के लिए आयोग से मिलने गए, तो उन्हें रोका गया और हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा ‘यह लड़ाई अब राजनीतिक नहीं, बल्कि संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत की रक्षा के लिए है।’ 


क्या है पूरा मामला?


दरअसल, हाल ही में राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदाता सूची में हेराफेरी, फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट वोटरों के नाम शामिल किए गए। खास तौर पर, उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा सीट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 1,00,250 फर्जी वोट डाले गए, जिसके कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ।


इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में भी इसी तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग से डिजिटल मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो और राजनीतिक दल स्वतंत्र रूप से डेटा का ऑडिट कर सकें।


चुनाव आयोग का जवाब 


इसके बाद चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को “झूठा और भ्रामक” करार देते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने 08 अगस्त को अपने जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही डिजिटल वोटर लिस्ट की मांग को 2019 में खारिज कर दिया था। आयोग ने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत शपथ पत्र जमा करने की मांग की, और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर उन्हें देश से माफी मांगनी होगी।

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