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धराली-हर्षिल में तबाही के सात दिन बाद भी लापता लोगों की तलाश जारी, रेस्क्यू में चुनौतियां बरकरार


Dharali-Harsil Rescue Operation: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में को धराली और हर्षिल इलाके में 05अगस्त को बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई। इस त्रासदी के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन आज सातवें दिन भी पूरे जोर-शोर से जारी है। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे इलाके को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया, जिसमें सैकड़ों लोग फंस गए और कई लापता हो गए। जिसके बाद से राहत और बचाव कार्यों में भारतीय सेना, NDRF, SDRF और अन्य एजेंसियां दिन-रात जुटी हुई हैं। लेकिन भारी बारिश, टूटी सड़कें, और जटिल भूभाग चुनौतियां बढ़ा रहे हैं।


आपदा से हुआ कितना नुकसान?


दरअसल, 05अगस्त को धराली और हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने से खीरगंगा और भागीरथी नदियों में अचानक सैलाब आ गया। जिसने कई गांवों, घरों, होटलों और यहां तक कि सेना के हर्षिल कैंप को भी अपनी चपेट में ले लिया। गंगोत्री नेशनल हाईवे का 30मीटर हिस्सा धंस गया, कई पुल बह गए और सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गए। इस आपदा में अब तक 05लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। जबकि 100से अधिक लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें सेना के 8-10जवान भी शामिल हैं।


बचाव कार्य में जुटे कई हेलिकॉप्टर


जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी के सातवें दिन भी बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। अब तक 1,308लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें से 177लोग बीते दिन मलबे से बाहर निकाले गए। वहीं, हेलिकॉप्टरों की मदद से 326सॉर्टीज़ की गईं, जिनमें भारतीय वायुसेना के 8चिनूक, MI-17और ALH हेलिकॉप्टर से और 56 UCADA एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा बचाव-कार्य के लिए हाई-टेक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।


सेना और NDRF ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर), LiDAR सर्वे, और ड्रोन का इस्तेमाल कर प्रभावित क्षेत्रों को स्कैन किया है। इसके अलावा हर्षिल में सेना की पैरा ब्रिगेड जलाशय के ऊपर स्पीड बोट के जरिए अस्थायी रास्ता बनाने की कोशिश कर रही है। ताकि राहत सामग्री और बचाव दल को आसानी से पहुंचाया जा सके। वहीं, धराली और हर्षिल में मेडिकल टीमें तैनात हैं, जिनमें विशेषज्ञ डॉक्टर, फार्मासिस्ट, और एम्बुलेंस शामिल हैं। अब तक 294बेड्स और 65आईसीयू बेड्स की व्यवस्था की गई है।


राहत-बचाव कार्य में चुनौतियां


मालूम हो कि लगातार बारिश ने मलबे को दलदल में बदल दिया है, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है। मुखवा और धराली को जोड़ने वाले फुटओवर ब्रिज में कई दरारें देखी गई हैं। जिसने राहत कार्यों को प्रभावित किया है। वहीं, गंगोत्री हाईवे और अन्य सड़कों के टूटने से बचाव दल सड़क मार्ग से प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहे, जिसके कारण हेलिकॉप्टर ही एकमात्र सहारा हैं। लेकिन खराब मौसम ने हेलिकॉप्टर उड़ानों को भी कई बार बाधित किया है।

Santosh Singhhttps://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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