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खून से लहूलूहान शरीर, 9 पाकिस्तानियों को अकेले खदेड़ा; भारत के इस लाल को दुनिया करती है सलाम


Kargil Vijay Diwas: यह कहानी है कारगिल की उस अमर गाथा की, जहां मश्कोह वैली के प्वाइंट 4875पर भारतीय वीरों ने अपने खून से वीरता से नया इतिहास लिखा। समुद्र तल से 15,990फीट की ऊंचाई पर बसा यह पॉइंट, जिसे ‘पिंपल टू’ के नाम से जाना जाता था, सामरिक दृष्टिकोण से अनमोल था । दुश्मन ने, आतंकियों का भेष धर, इस चोटी पर कब्जा जमाया था, मगर भारत मां के सपूतों ने ठान लिया था कि इस पवित्र माटी को वापस लेकर रहेंगे। इस असंभव-से मिशन का जिम्मा सौंपा गया 17जाट रेजीमेंट के शेरों को।6जुलाई 1999को मेजर ऋतेश शर्मा ने चार्ली कंपनी के साथ इस रणभूमि में कदम रखा। दुश्मन की गोलीबारी और कठिन चट्टानों के बीच, उन्होंने “लोहा लेने” की ठानी।


 7 जुलाई को बजा युद्ध का बिगुल


 7 जुलाई को युद्ध का बिगुल बजा, और रणबांकुरों ने दुश्मन से सीधे दो-दो हाथ किए। रण में मेजर ऋतेश शर्मा बुरी तरह घायल हो गए, फिर भी उनका हौसला “आसमान छूता” रहा। उन्हें बेस पर इलाज के लिए भेजा गया, और अब कमान संभाली कैप्टन अनुज नय्यर ने। अनुज ने जान की बाजी लगाकर चार्ली कंपनी को नई ताकत दी, जैसे शेर अपनी गर्जना से जंगल को दहलाता है। यह थी वह जंग, जहां हर सैनिक ने “सीने में आग और दिल में देश” लिए, प्वाइंट 4875को फिर से भारत का बनाया। उनकी वीरता की कहानी आज भी गूंजती है, जो हर हिंदुस्तानी को “हौसले की मशाल” जलाने को प्रेरित करती है।


कैप्टन अनुज नय्यर की अदम्य वीरता


कैप्टन अनुज नय्यर ने युद्ध के मैदान में अपनी रणनीतिक कुशलता और साहस का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी हमलावर टुकड़ी को दो हिस्सों में बांटा, जिसमें पहली टुकड़ी का नेतृत्व कैप्टन विक्रम बत्रा ने किया, और दूसरी टुकड़ी की कमान उन्होंने स्वयं संभाली। टोही दस्ते से चार दुश्मन बंकरों की जानकारी मिलने पर कैप्टन अनुज ने तुरंत हमले की योजना बनाई। जैसे ही भारतीय सैनिक आगे बढ़े, दुश्मन ने भारी मोर्टार और तोपखाने की गोलाबारी शुरू कर दी। लेकिन कैप्टन अनुज और उनकी टीम ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने रॉकेट लांचर और ग्रेनेड से पहले बंकर को ध्वस्त किया और एक-एक करके तीन अन्य बंकरों को भी नष्ट कर दिया, जिससे दुश्मन की रक्षा पंक्ति कमजोर पड़ गई। 


अकेले नौ दुश्मन सैनिकों को मार गिरया


दुश्मन ने भारतीय सैनिकों के इस जोश को देखकर स्वचालित मशीनगनों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। कैप्टन अनुज ने अपनी जान की परवाह किए बिना हमला जारी रखा, लेकिन इस दौरान दुश्मन के रॉकेट लांचर से दागे गए ग्रेनेड ने उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। युद्धभूमि में ही उन्होंने देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया। इस लड़ाई में कैप्टन अनुज ने अकेले नौ दुश्मन सैनिकों को मार गिराया और तीन मध्यम मशीनगन पोजीशन को नष्ट किया। उनकी वीरता ने प्वाइंट 4875पर तिरंगे को गर्व से फहराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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Santosh Singh is owner and cheif editor of Samachar Live, an independent Hindi news and information website. He is involved in researching, preparing, editing and publishing news content across various categories. Contact him at samacharlive.in@gmail.com chaeck more https://www.samacharlive.in/author-santosh-singh
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